प्रेम का प्याला पी कर आना ठाकुर जी को भोग लगाना गांव चरोरा की गलियों में बाजेंगी खड़ताल,होली खेलेंगे होगा खूब धमाल, होली खेलेंगे भारत के सब लाल होली खेलेंगे
Author: PehliKalam
राष्ट्र प्रेम की लहर उठी है
राष्ट्र प्रेम की लहर उठी है, मोदी के परिवार में । आओ मिलकर आग लगा दें, पूरे भ्रष्टाचार में ।।
हमने जहां में सबको देखा है आजमाकर, मतलब नहीं रखेंगे अब हम किसी से ज्यादा ।। उसकी फिकर ‘ चरौरा ‘ करना तू छोड़ दे अब, आता नहीं है कुछ भी उसे शायरी से ज्यादा ।।
गज़ब की राजनीति है साब
गज़ब की राजनीति है साब बारिश का मौसम आते ही सारे मेंढक फूल गए । टर्र -टर्र के चक्कर में हम कविता लिखना भूल गए ।। प्यासी भैंस घुसी हैं जब से राजनीति की पोखर में । गन्दी नाली के सब कीड़े पूंछ पकड़कर झूल गए ।।
खिड़कियों पर जालियां हैं
खिड़कियों पर जालियां हैं, ये पता कैसे चले ? युद्ध की तैयारियां हैं, ये पता कैसे चले ? तन बदन की सब नसें दुखने लगीं हैं इन दिनों, कौन सी बीमारियां हैं, ये पता कैसे चले ? बैग में हथियार होंगे, ये हमें अनुमान था, कील हैं या आरियां हैं, ये पता कैसे चले ? […]
बज़्म में आएगा कौन- कौन
मिसरे, गज़ल या नज्म सुनाएगा कौन- कौन ! ये तो बता कि बज़्म में आएगा कौन- कौन !! उम्मीद किसी से भी ‘चरौरा’ नहीं मुझे ! अब देखना है मुझको बुलाएगा कौन – कौन !!
मेरा गांव मेरा देश
पाँच सितारा इक होटल में, मैने अपने गांव को देखा ।। खट्टे बेरों वाली झाड़ी, दो गमलों में लगी हुई थी । एक पुरानी घोड़ा गाड़ी, दरवाजे पर खड़ी हुई थी । शीशे की सब दीवारों पर, काली – पीली छांव को देखा, पहली मंजिल पर देखा था, चूल्हे से बतियाता आँगन, सुबह की सरगम […]
वृद्धाश्रम बन जाते हैं
जब- जब बच्चे अपने घर के, जड़ कुटुंब ठुकराते हैं ! तब -तब इस पावन वसुधा पर,वृद्धाश्रम बन जाते हैं !! धूप के आगे तेज हवा भी, मद्धम होती जाती है ! घर में रक्खी रद्दी की कीमत कम होती जाती है !! जैसे माला में फूलों का , हार ज़रूरी होता है ! जीवन […]
पूरी रैन न सोए हम
बार – बार पलकें झपकाईं , पूरी रैन न सोए हम, बारह सौ में नींद खरीदी, वो भी वापिस चली गई ।
बैठे हैं
हाथ में लेके ताज, बैठे हैं, जाओ मिल लो, वो आज बैठे हैं ।। नन्हीं चिड़ियों को कैद में रखना, इन बगीचों में बाज बैठे हैं ।।