भारत माता की गति को अब मंद नहीं होने देंगे, इंसानों से इंसानों का द्वंद नहीं होने देंगे । प्यार मोहब्बत बांटेंगे हम, नफ़रत के बाजारों में, भारत में रहकर हम भारत बन्द नहीं होने देंगे ।।
Category: कविता
जग में वीर कहां है अब
लक्ष्मण रेखा खींच सके जो, ऐसा धीर कहां हैं अब ? लक्ष्य भेदकर आने वाला, असली तीर कहां है अब ।? काली रस्सी को ज़हरीला सांप बताती है दुनियां । राजगुरू सुखदेव भगत सा जग में वीर कहां है अब ।?
आप मेरे गांव में भी आके देख लो हे राम , कैसे-कैसे कष्ट यहां झेलती हैं बेटियां । प्यार वाले दायरे से दूर होकर अंगना में , आंसुओं से चुपचाप खेलती हैं बेटियां ।। जिंदगी की सूखी हुई झील के किनारे तक , स्वाभिमान का शिकार ठेलती हैं बेटियां । बहू, बेटी ,बहन और मां […]
भारत के सब लाल होली खेलेंगे
प्रेम का प्याला पी कर आना ठाकुर जी को भोग लगाना गांव चरोरा की गलियों में बाजेंगी खड़ताल,होली खेलेंगे होगा खूब धमाल, होली खेलेंगे भारत के सब लाल होली खेलेंगे
गज़ब की राजनीति है साब
गज़ब की राजनीति है साब बारिश का मौसम आते ही सारे मेंढक फूल गए । टर्र -टर्र के चक्कर में हम कविता लिखना भूल गए ।। प्यासी भैंस घुसी हैं जब से राजनीति की पोखर में । गन्दी नाली के सब कीड़े पूंछ पकड़कर झूल गए ।।
खिड़कियों पर जालियां हैं
खिड़कियों पर जालियां हैं, ये पता कैसे चले ? युद्ध की तैयारियां हैं, ये पता कैसे चले ? तन बदन की सब नसें दुखने लगीं हैं इन दिनों, कौन सी बीमारियां हैं, ये पता कैसे चले ? बैग में हथियार होंगे, ये हमें अनुमान था, कील हैं या आरियां हैं, ये पता कैसे चले ? […]
पूरी रैन न सोए हम
बार – बार पलकें झपकाईं , पूरी रैन न सोए हम, बारह सौ में नींद खरीदी, वो भी वापिस चली गई ।
बैठे हैं
हाथ में लेके ताज, बैठे हैं, जाओ मिल लो, वो आज बैठे हैं ।। नन्हीं चिड़ियों को कैद में रखना, इन बगीचों में बाज बैठे हैं ।।
गीत —
जब- जब बच्चे अपने घर के, जड़ कुटुंब ठुकराते हैं ! तब -तब इस पावन वसुधा पर,वृद्धाश्रम बन जाते हैं !! धूप के आगे तेज हवा भी, मद्धम होती जाती है ! घर में रक्खी रद्दी की कीमत कम होती जाती है !! जैसे माला में फूलों का , हार ज़रूरी होता है ! जीवन […]
कविता
खिड़कियों पर जालियां हैं, ये पता कैसे चले ? युद्ध की तैयारियां हैं, ये पता कैसे चले ? तन बदन की सब नसें दुखने लगीं हैं इन दिनों, कौन सी बीमारियां हैं, ये पता कैसे चले ? बैग में हथियार होंगे, ये हमें अनुमान था, कील हैं या आरियां हैं, ये पता कैसे चले ? […]