बहते पानी में बहकर इनाम आ गया, भूला बिसरा हुनर आज काम आ गया ।
Category: शायरी
बांधे हैं हाथ हमने, दुश्मन को ये भरम है ! है वक्त अब दिखा दो बाजू में कितना दम है !! जिस देश की ज़मीं से मिलती है हमको ताकत ! उसके लिए ये जां भी देनी पड़े तो कम है !!
मेरा भारत मेरा स्वाभिमान
माँ की गर्दन काटने वाला आरा नहीं बनेंगे हम । नकली भाईचारे का अब चारा नहीं बनेंगे हम ।।
एक कास्ट हो राष्ट्र की
एक कास्ट हो राष्ट्र की, भाषा भले अनेक , पूरे हिंदुस्तान में, हिन्दू हो प्रत्येक ।।
दुख दर्द के बहाने रिश्तों को आजमाना । कितना अजीब है ये दुख दर्द का बहाना ।। इस युग में आदमी की फितरत ये हो गयी है, शीशे की छत बनाकर, छप्पर को भूल जाना ।।
शीर्ष पर ये हिंद होगा
धर्म के इस युद्ध में फिर कौरवों की मात होगी, पाँव भी होंगे ज़मीं पर, आसमां की बात होगी । चार सौ का लक्ष्य हमको साथ मिलकर भेदना है, शीर्ष पर ये हिंद होगा, स्वर्ण की बरसात होगी ।।
ग्वाला बनकर बांसुरी की वंदना करनी पड़ेगी , आज फिर गौ लोक जाकर साधना करनी पड़ेगी । हिंद में अब कौरवों की भीड़ ज़्यादा हो गयी है , पांडवों के सारथी से याचना करनी पड़ेगी ।।
राष्ट्र प्रेम की लहर उठी है
राष्ट्र प्रेम की लहर उठी है, मोदी के परिवार में । आओ मिलकर आग लगा दें, पूरे भ्रष्टाचार में ।।
हमने जहां में सबको देखा है आजमाकर, मतलब नहीं रखेंगे अब हम किसी से ज्यादा ।। उसकी फिकर ‘ चरौरा ‘ करना तू छोड़ दे अब, आता नहीं है कुछ भी उसे शायरी से ज्यादा ।।