दुख दर्द के बहाने रिश्तों को आजमाना

दुख दर्द के बहाने रिश्तों को आजमाना ।

कितना अजीब है ये दुख दर्द का बहाना ।।

इस युग में आदमी की फितरत ये हो गयी है,

शीशे की छत बनाकर, छप्पर को भूल जाना ।।

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ग्वाला बनकर बांसुरी की वंदना करनी पड़ेगी , आज फिर गौ लोक जाकर साधना करनी पड़ेगी । हिंद में अब कौरवों की भीड़ ज़्यादा हो गयी है , पांडवों के सारथी से याचना करनी पड़ेगी ।।