धर्म के इस युद्ध में फिर कौरवों की मात होगी, पाँव भी होंगे ज़मीं पर, आसमां की बात होगी । चार सौ का लक्ष्य हमको साथ मिलकर भेदना है, शीर्ष पर ये हिंद होगा, स्वर्ण की बरसात होगी ।।
दुख दर्द के बहाने रिश्तों को आजमाना । कितना अजीब है ये दुख दर्द का बहाना ।। इस युग में आदमी की फितरत ये हो गयी है, शीशे की छत बनाकर, छप्पर को भूल जाना ।।