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पानी

बहते पानी में बहकर इनाम आ गया, भूला बिसरा हुनर आज काम आ गया ।

ग्वाला बनकर बांसुरी की वंदना करनी पड़ेगी

ग्वाला बनकर बांसुरी की वंदना करनी पड़ेगी , आज फिर गौ लोक जाकर साधना करनी पड़ेगी । हिंद में अब कौरवों की भीड़ ज़्यादा हो गयी है , पांडवों के सारथी से याचना करनी पड़ेगी ।।

हमने जहां में सबको देखा है आजमाकर

हमने जहां में सबको देखा है आजमाकर, मतलब नहीं रखेंगे अब हम किसी से ज्यादा ।। उसकी फिकर ‘ चरौरा ‘ करना तू छोड़ दे अब, आता नहीं है कुछ भी उसे शायरी से ज्यादा ।।