दुख दर्द के बहाने रिश्तों को आजमाना

दुख दर्द के बहाने रिश्तों को आजमाना ।

कितना अजीब है ये दुख दर्द का बहाना ।।

इस युग में आदमी की फितरत ये हो गयी है,

शीशे की छत बनाकर, छप्पर को भूल जाना ।।

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पानी

बहते पानी में बहकर इनाम आ गया, भूला बिसरा हुनर आज काम आ गया ।

हमने जहां में सबको देखा है आजमाकर

हमने जहां में सबको देखा है आजमाकर, मतलब नहीं रखेंगे अब हम किसी से ज्यादा ।। उसकी फिकर ‘ चरौरा ‘ करना तू छोड़ दे अब, आता नहीं है कुछ भी उसे शायरी से ज्यादा ।।