हमने जहां में सबको देखा है आजमाकर

हमने जहां में सबको देखा है आजमाकर,

मतलब नहीं रखेंगे अब हम किसी से ज्यादा ।।

उसकी फिकर ‘ चरौरा ‘ करना तू छोड़ दे अब,

आता नहीं है कुछ भी उसे शायरी से ज्यादा ।।

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शीर्ष पर ये हिंद होगा

धर्म के इस युद्ध में फिर कौरवों की मात होगी, पाँव भी होंगे ज़मीं पर, आसमां की बात होगी । चार सौ का लक्ष्य हमको साथ मिलकर भेदना है, शीर्ष पर ये हिंद होगा, स्वर्ण की बरसात होगी ।।

दुख दर्द के बहाने रिश्तों को आजमाना

दुख दर्द के बहाने रिश्तों को आजमाना । कितना अजीब है ये दुख दर्द का बहाना ।। इस युग में आदमी की फितरत ये हो गयी है, शीशे की छत बनाकर, छप्पर को भूल जाना ।।