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पानी

बहते पानी में बहकर इनाम आ गया, भूला बिसरा हुनर आज काम आ गया ।

दुख दर्द के बहाने रिश्तों को आजमाना

दुख दर्द के बहाने रिश्तों को आजमाना । कितना अजीब है ये दुख दर्द का बहाना ।। इस युग में आदमी की फितरत ये हो गयी है, शीशे की छत बनाकर, छप्पर को भूल जाना ।।