ठेठ किसान का बेटा हूँ खेती की बात सुनाता हूँ

जहाँ मेहनत की होती पूजा, मैं गीत वहां के गाता हूँ ,

ठेठ किसान का बेटा हूँ, खेती की बात सुनाता हूँ ।।

यहाँ कोई भेद नहीं रखता, सब मिलकर खुशी मनाते हैं ,

कुछ और न आता हो हमको, हम खुलकर प्यार निभाते हैं।।

जिसे खाकर है जिंदा दुनियाँ, जिसे खाकर——।

मैं गेंहूँ ,धान उगाता हूँ,,

जहाँ मेहनत की होती पूजा, मैं गीत वहां के गाता हूँ !

ठेठ किसान का बेटा हूँ, खेती की बात सुनाता हूँ !!

रहते हों शहर में लोग तो क्या, अपना तो गांव से नाता है,

मिलकर करते हों काम जहां, हमें वो परिवेश सुहाता है ।।

जहाँ सरसों के साग से हों रोटी, जहाँ सरसों ——-

मैं ऐसे गांव से आता हूँ,

जहाँ मेहनत की होती पूजा, मैं गीत वहां के गाता हूँ !

ठेठ किसान का बेटा हूँ, खेती की बात सुनाता हूँ !!

बैलों के घुँघरू की धुन पर, जहाँ अम्मा गीत सुनाती है ,

होली के रंग उड़ें दिन भर जहाँ होती रोज दिवाली है ।।

उस गांव में मैने जन्म लिया, उस गांव ———/

ये सोच के मैं इतराता हूँ,

जहाँ मेहनत की होती पूजा, मैं गीत वहां के गाता हूँ ,

ठेठ किसान का बेटा हूँ, खेती की बात सुनाता हूँ ।।

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