सम्भव है क्या

जैसा माली सोच रहा है । ये हो पाना सम्भव है क्या ? भरत भूमि पर बागानों के, नाम अलग हैं, रंग अलग हैं । अलग-अलग मौसम हैं सबके, खिलने के भी ढंग अलग हैं ।। सतरंगी पुष्पों से उनके , रंग मिटाना सम्भव है क्या ? जैसा माली सोच रहा है । ये हो […]

जीवन यात्रा

जीवन यात्रा पर कहने को, कुछ भी नहीं बचा है शेष । अंत समय तक भरमायेगी, ऐसी है जीवन की रेस ।। जब तक हरियाली कायम है, तब तक ये लहरायेंगे । पतझर के आते ही, पत्ते टहनी से झर जाएंगे ।। पूरा जंगल कांप उठेगा, आग लगेगी पत्तों को । वानर मिलकर खा जाएंगे, […]

मेरे देश में राम के मंदिर हैं

मेरे देश में राम के मंदिर हैं,और बजरंगी रखवारे हैं । यहां खेल घृणा का बंद हुआ अब खुशियों के फव्वारे हैं । यहां राम लला का है पूजन, अब प्रेम के गीत मुखर होंगे । यहां राम नाम के शंख बजे, अब रामकथा के स्वर होंगे ।। यहां सीता राम लखन आये, अब स्वर्ग […]

राजनीति के तीनों बन्दर आये हैं बाजार में

राजनीति के तीनों बन्दर आये हैं बाजार में । तीनों के तन तर्र्म तर हैं राजनीति के प्यार में ।। आँख बन्द हैं, कान बन्द हैं, लच्छेदार जुबान है । चौसर वाली कटु चालों में, कैद सभी की जान है ।। नफ़रत के अंकुर बोने को, तीनों ही मजबूर हैं । प्यार मुहब्बत वाले पथ […]

जग में वीर कहां है अब

लक्ष्मण रेखा खींच सके जो, ऐसा धीर कहां हैं अब ? लक्ष्य भेदकर आने वाला, असली तीर कहां है अब ।? काली रस्सी को ज़हरीला सांप बताती है दुनियां । राजगुरू सुखदेव भगत सा जग में वीर कहां है अब ।?

दुख दर्द के बहाने रिश्तों को आजमाना

दुख दर्द के बहाने रिश्तों को आजमाना । कितना अजीब है ये दुख दर्द का बहाना ।। इस युग में आदमी की फितरत ये हो गयी है, शीशे की छत बनाकर, छप्पर को भूल जाना ।।

आंसुओं से चुपचाप खेलती हैं बेटियां

आप मेरे गांव में भी आके देख लो हे राम , कैसे-कैसे कष्ट यहां झेलती हैं बेटियां । प्यार वाले दायरे से दूर होकर अंगना में , आंसुओं से चुपचाप खेलती हैं बेटियां ।। जिंदगी की सूखी हुई झील के किनारे तक , स्वाभिमान का शिकार ठेलती हैं बेटियां । बहू, बेटी ,बहन और मां […]

जाट कौ ब्याह

जाट देव को ब्याह भयौ जब, कारी आँधी आई । कुठला भीज गयौ गेंहूँ कौ, गावैं गीत लुगाई ।। ठाकुर जी ने भाग- भाग कै, न्यौतो गाम चरौरा । सपना जैसी बहू मिलेगी, पीट्यो खूब ढिंढोरा ।। पीट्यो खूब ढिंढोरा भैय्या रोटी घर मत खइयो । दूध जलेबी खइयो झिककेँ, मोछन ऐंठा दईयो ।। बटुआ […]

शीर्ष पर ये हिंद होगा

धर्म के इस युद्ध में फिर कौरवों की मात होगी, पाँव भी होंगे ज़मीं पर, आसमां की बात होगी । चार सौ का लक्ष्य हमको साथ मिलकर भेदना है, शीर्ष पर ये हिंद होगा, स्वर्ण की बरसात होगी ।।

ग्वाला बनकर बांसुरी की वंदना करनी पड़ेगी

ग्वाला बनकर बांसुरी की वंदना करनी पड़ेगी , आज फिर गौ लोक जाकर साधना करनी पड़ेगी । हिंद में अब कौरवों की भीड़ ज़्यादा हो गयी है , पांडवों के सारथी से याचना करनी पड़ेगी ।।