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दुख दर्द के बहाने रिश्तों को आजमाना

दुख दर्द के बहाने रिश्तों को आजमाना । कितना अजीब है ये दुख दर्द का बहाना ।। इस युग में आदमी की फितरत ये हो गयी है, शीशे की छत बनाकर, छप्पर को भूल जाना ।।

पानी

बहते पानी में बहकर इनाम आ गया, भूला बिसरा हुनर आज काम आ गया ।

बांधे हैं हाथ हमने दुश्मन को ये भरम है

बांधे हैं हाथ हमने, दुश्मन को ये भरम है ! है वक्त अब दिखा दो बाजू में कितना दम है !! जिस देश की ज़मीं से मिलती है हमको ताकत ! उसके लिए ये जां भी देनी पड़े तो कम है !!