जग में वीर कहां है अब

लक्ष्मण रेखा खींच सके जो, ऐसा धीर कहां हैं अब ?

लक्ष्य भेदकर आने वाला, असली तीर कहां है अब ।?

काली रस्सी को ज़हरीला सांप बताती है दुनियां ।

राजगुरू सुखदेव भगत सा जग में वीर कहां है अब ।?

Related Post

आंसुओं से चुपचाप खेलती हैं बेटियां

आप मेरे गांव में भी आके देख लो हे राम , कैसे-कैसे कष्ट यहां झेलती हैं बेटियां । प्यार वाले दायरे से दूर होकर अंगना में , आंसुओं से चुपचाप खेलती हैं बेटियां ।। जिंदगी की सूखी हुई झील के किनारे तक , स्वाभिमान का शिकार ठेलती हैं बेटियां । बहू, बेटी ,बहन और मां […]

पूरी रैन न सोए हम

बार – बार पलकें झपकाईं , पूरी रैन न सोए हम, बारह सौ में नींद खरीदी, वो भी वापिस चली गई ।

गीत —

जब- जब बच्चे अपने घर के, जड़ कुटुंब ठुकराते हैं ! तब -तब इस पावन वसुधा पर,वृद्धाश्रम बन जाते हैं !! धूप के आगे तेज हवा भी, मद्धम होती जाती है ! घर में रक्खी रद्दी की कीमत कम होती जाती है !! जैसे माला में फूलों का , हार ज़रूरी होता है ! जीवन […]