दुख दर्द के बहाने रिश्तों को आजमाना

दुख दर्द के बहाने रिश्तों को आजमाना ।

कितना अजीब है ये दुख दर्द का बहाना ।।

इस युग में आदमी की फितरत ये हो गयी है,

शीशे की छत बनाकर, छप्पर को भूल जाना ।।

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शीर्ष पर ये हिंद होगा

धर्म के इस युद्ध में फिर कौरवों की मात होगी, पाँव भी होंगे ज़मीं पर, आसमां की बात होगी । चार सौ का लक्ष्य हमको साथ मिलकर भेदना है, शीर्ष पर ये हिंद होगा, स्वर्ण की बरसात होगी ।।

ग्वाला बनकर बांसुरी की वंदना करनी पड़ेगी

ग्वाला बनकर बांसुरी की वंदना करनी पड़ेगी , आज फिर गौ लोक जाकर साधना करनी पड़ेगी । हिंद में अब कौरवों की भीड़ ज़्यादा हो गयी है , पांडवों के सारथी से याचना करनी पड़ेगी ।।