जाट देव को ब्याह भयौ जब, कारी आँधी आई ।
कुठला भीज गयौ गेंहूँ कौ, गावैं गीत लुगाई ।।
ठाकुर जी ने भाग- भाग कै, न्यौतो गाम चरौरा ।
सपना जैसी बहू मिलेगी, पीट्यो खूब ढिंढोरा ।।
पीट्यो खूब ढिंढोरा भैय्या रोटी घर मत खइयो ।
दूध जलेबी खइयो झिककेँ, मोछन ऐंठा दईयो ।।
बटुआ नैक बड़ो सो धरियो, कररी होय मिलाई ।
जाट देव को ब्याह भयौ जब, कारी आँधी आई ।। 1
शादी के दिन पों- पों करती, आय गयी मथुरा मेल ।
अपने -अपने पनहां पकरिके, भर गए ठेलम ठेल ।।
बीस बराती भीतर घुस गए, बाहर रह गए चार ।
फूफा कू कहीं जगह न पाई, वा ने लपकी कार ।।
कार में लपकी सीट पिछल्ली, अगली हाथ में आयी ।
जाट देव को ब्याह भयो जब, कारी आँधी आई ।। 2
जीजा ढूंढ रह्यो गाड़ी में, एक पाम को जूता ।
तभी अचानक गुस्सा है गो, छोटो बारो फूफा ।।
चार पैग सूंते फूफा ने, झिककेँ पी लई भांग ।
टूट गयो बीड़ी को बंडल, टेडी है गयी टांग ।।
फूफा ने फिर हैट,- हैट कै,सबकी करी खिंचाई।
जाट देव को ब्याह भयो जब, कारी आँधी आई ।। 3
जल्दी-जल्दी के चक्कर में, कारी है गई रात ।
जैसे तैसे जनमासे तक पहुँच गयी बारात ।।
नागिन बारो, डीजे बारो , बेंड खड्यो तैय्यार ।
इतने में है गयी अचानक , बोतल पे तकरार ।।
बोतल पे तकरार हुई फिर नई पेटी खुलवाई ,
जाट देव को ब्याह भयो जब, कारी आँधी आई ।।4
चाय नाश्ता कहीं न पायौ, घर में दे दौ तारौ ।
सबसे पहले चढ़त होयगी, बोल्यो बेटी बारौ ।।
नये लबारे दारू पीके , मचा रहे हुड़दंग ।
बिना पिये जो चुप्प खड़े थे, सबकू लग गयी ठंड ।।
सबकू लग गयी ठंड , मिली ना घर में एक रजाई ।
जाट देव को ब्याह भयो जब, कारी आँधी आई ।। 5
बारह बजे परिनगे फेरे, कहबे आयो नउआ ।
भोजन बनके त्यार धरयो है,जल्दी पील्यो पाऊआ।।
जनमासे में भग्गी परगयी, बोल्यो जीजा आयके ।
फूफा कूट दयो दूल्हा को, भगल्यो पोंछ दबायके ।।
भगल्यो पोंछ दबायके वरना सबकी होय कुटाई ।
जाट देव को ब्याह भयो जब, कारी आँधी आई ।। 6
बीस बराती घर में घुस गए, है रई धक्कमधक्का,
घूर -घूर कर देख रहो, छोरी को छोटो कक्का ।
जान बचायकेँ भगे ‘कमांडो’ मिल्यो रंग में भंग ।
भैय्या जी के फेरे पड़ गए, भाभी जी के संग ।।
भईया भाभी खूब हँसे जब हमने कथा सुनाई ।
भैय्या जी को ब्याह भयो जब, कारी आँधी आई ।। 7