फूफा की सेवा फूफा जी को देखकर, पूरा घर गमगीन । ढक कर रख दी मेज पर, थोड़ी सी नमकीन ।। थोड़ी सी नमकीन, चने थे पीले- पीले बिल्कुल ठंडी चाय, मिले दो बिस्कुट गीले कह समोद कविराय, हाथ में लेकर जूता । लक्ष्यदीप पर आय गए फूफी अर फूफा ।।