प्रभु श्री राम की मातृभूमि के प्रति निष्ठा

प्रभु श्री राम को 14 वर्ष का वनवास मिला था । 14 वर्ष के लिए मातृभूमि से वियोग उनके लिए लाचारी था । पर 14 वर्ष से एक दिन भी अधिक मातृभूमि से वियोग उन्हें सहन नहीं था । विभीषण के अनेक आग्रह के पश्चात भी लंका नगरी में प्रवेश नहीं किया । त्रिभुवन में श्री लंका का डंका बजता था उसे देखने की इच्छा नहीं हुई जैसे जनकपुरी की शोभा देखने की इच्छा हुई और गुरु की आज्ञा से देखी भी । नहीं तो भारत के पास दो-चार दिन या कुछ दिन विलंब से पहुंचने का संवाद भेज सकते थे । पर मातृभूमि से एक दिन भी वियोग गवारा नहीं हुआ । यह थी प्रभु श्री राम की मातृभूमि के प्रति निष्ठा ।🚩 जय श्री राम