सम्भव है क्या

जैसा माली सोच रहा है ।

ये हो पाना सम्भव है क्या ?

भरत भूमि पर बागानों के,

नाम अलग हैं, रंग अलग हैं ।

अलग-अलग मौसम हैं सबके,

खिलने के भी ढंग अलग हैं ।।

सतरंगी पुष्पों से उनके ,

रंग मिटाना सम्भव है क्या ?

जैसा माली सोच रहा है ।

ये हो पाना सम्भव है क्या ?

दिन में सूरज,रात को चंदा,

जिनकी पहरेदारी पर हों ।

इंद्रधनुष जैसे उपवन में,

भँवरे भी गुंजारी पर हों ।

भ्रमर-पुष्प के आलिंगन को ,

दूर हटाना सम्भव है क्या ?

जैसा माली सोच रहा है ।

ये हो पाना सम्भव है क्या ?

कुछ पुष्पों की शाखाओं पर,

शूल मिलेंगे ये सम्भव है ।

फिर भी प्रतिदिन उषाकाल में ,

फूल खिलेंगे ये सम्भव है ।

उल्लू वाली शाखाओं पर,

हंस बिठाना संभव है क्या ?

जैसा माली सोच रहा है ।

ये हो पाना सम्भव है क्या ?

लालच के इस अंधियारे में,

पांव जमाए बैठे हैं जो ,

अपनी-अपनी आरी लेकर,

घात लगाए बैठे हैं जो ,

कानों से बहरे बाजों से,

बाग बचाना सम्भव है क्या ।

जैसा माली सोच रहा है ।

ये हो पाना सम्भव है क्या ?

Related Post

मेरे देश में राम के मंदिर हैं

मेरे देश में राम के मंदिर हैं,और बजरंगी रखवारे हैं । यहां खेल घृणा का बंद हुआ अब खुशियों के फव्वारे हैं । यहां राम लला का है पूजन, अब प्रेम के गीत मुखर होंगे । यहां राम नाम के शंख बजे, अब रामकथा के स्वर होंगे ।। यहां सीता राम लखन आये, अब स्वर्ग […]

जीवन यात्रा

जीवन यात्रा पर कहने को, कुछ भी नहीं बचा है शेष । अंत समय तक भरमायेगी, ऐसी है जीवन की रेस ।। जब तक हरियाली कायम है, तब तक ये लहरायेंगे । पतझर के आते ही, पत्ते टहनी से झर जाएंगे ।। पूरा जंगल कांप उठेगा, आग लगेगी पत्तों को । वानर मिलकर खा जाएंगे, […]