जैसा माली सोच रहा है ।
ये हो पाना सम्भव है क्या ?
भरत भूमि पर बागानों के,
अलग-अलग मौसम हैं सबके,
खिलने के भी ढंग अलग हैं ।।
सतरंगी पुष्पों से उनके ,
रंग मिटाना सम्भव है क्या ?
जैसा माली सोच रहा है ।
ये हो पाना सम्भव है क्या ?
दिन में सूरज,रात को चंदा,
जिनकी पहरेदारी पर हों ।
इंद्रधनुष जैसे उपवन में,
भँवरे भी गुंजारी पर हों ।
भ्रमर-पुष्प के आलिंगन को ,
दूर हटाना सम्भव है क्या ?
जैसा माली सोच रहा है ।
ये हो पाना सम्भव है क्या ?
कुछ पुष्पों की शाखाओं पर,
शूल मिलेंगे ये सम्भव है ।
फिर भी प्रतिदिन उषाकाल में ,
फूल खिलेंगे ये सम्भव है ।
उल्लू वाली शाखाओं पर,
हंस बिठाना संभव है क्या ?
जैसा माली सोच रहा है ।
ये हो पाना सम्भव है क्या ?
लालच के इस अंधियारे में,
पांव जमाए बैठे हैं जो ,
अपनी-अपनी आरी लेकर,
घात लगाए बैठे हैं जो ,
कानों से बहरे बाजों से,
बाग बचाना सम्भव है क्या ।
जैसा माली सोच रहा है ।
ये हो पाना सम्भव है क्या ?