जीवन यात्रा पर कहने को,
कुछ भी नहीं बचा है शेष ।
अंत समय तक भरमायेगी,
जब तक हरियाली कायम है,
तब तक ये लहरायेंगे ।
पतझर के आते ही, पत्ते
टहनी से झर जाएंगे ।।
पूरा जंगल कांप उठेगा,
आग लगेगी पत्तों को ।
वानर मिलकर खा जाएंगे,
मधुमक्खी के छत्तों को ।
फिर से ये मौसम बदलेगा,
बदलेगा पूरा परिवेश ।
अंत समय तक भरमायेगी,
ऐसी है जीवन की रेस ।।…1
सूखे जंगल में फिर इक दिन,
पीले पात हरे होंगे ।
इस धरती के हर कोने में,
जल से ताल भरे होंगे ।।
बादल भी अपनी मस्ती में,
खलल नहीं पड़ने देगा।
सूरज को पूरे जंगल पर ,
राज नहीं करने देगा ।
आने वाली ऋतु बसन्त ने,
पास किया है ये आदेश ।।
अंत समय तक भरमायेगी
ऐसी है जीवन की रेस ।।…..2
छोटे तालाबों पर बगुले,
अपना दावा ठोकेंगे ।
नदियों पर शासन करने को,
बहता पानी रोकेंगे ।।
सागर में घोंघे घूमेंगे,
शंख तटों पर आएंगे ।
हंस चुगेंगे दाना तिनका
कव्वे मोती खाएंगे ।।
जिसको जीवन दान मिलेगा,
वो ही होगा दूत विशेष ।।
अंत समय तक भरमायेगी,
ऐसी है जीवन की रेस।।……3
सूखे और हरे जंगल की ,
पुस्तक में ही छवि होगी ,
जितने सुंदर पुष्प खिलेंगे,
उतनी ही दुर्गति होगी ।।
एक जलाशय की परिधि में,
बगुले ही बगुले होंगे ।
मछली कीचड़ को खाएंगी,
मगरों के जलवे होंगे ।।
हंसों के ह्रदय में होंगे,
ब्रह्मा विष्णु और महेश ।।
अंत समय तक भरमायेगी,
ऐसी है जीवन की रेस ।।…….4
किसके साथ रहेगा कछुआ,
किसके घर होगा खरगोश ?
हाथी किसको प्यार करेगा,
गेंडा किसको देगा दोष ।?
चूहा किसका बिल खोदेगा,
बकरी किसको देगी दूध ?
किसको कौन उधारी देगा,
किसका कितना होगा सूद ?
पूरी दुनियां में कब होगा,
सबसे सुंदर अपना देश ।।
अंत समय तक भरमायेगी,
ऐसी है जीवन की रेस।।……5